School of Economics | Indian Poverty
244
archive,tag,tag-indian-poverty,tag-244,ajax_fade,page_not_loaded,,qode-title-hidden,qode_grid_1300,qode-content-sidebar-responsive,qode-theme-ver-11.1,qode-theme-bridge,wpb-js-composer js-comp-ver-5.1.1,vc_responsive

मुकेश असीम फ़रवरी 2017 के बजट में की गयी घोषणा के मुताबिक़ किसानों और कृषि उद्योगों के आपसी सम्बन्धों को गहरा करने हेतु केन्द्र सरकार के कृषि मन्त्रालय ने 23 दिसम्बर को कृषि उत्पादन और पशुपालन में काॅण्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा...

Jayati Ghosh There is no doubt that human life is cheap in India, perhaps more so now than ever before. The attacks, atrocities and killings of people from minorities and marginalised groups that have now become so common are particularly appalling because they reflect a culture...

वैश्विक भूख सूचकांक में 100वें स्थान पर भारत 70 साल की आज़ादी का हासिल : भूख और कुपोषण के क्षेत्र में महाशक्ति मुकेश असीम भारत में दो वर्ष तक की उम्र के 10% से भी कम बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पोषक भोजन उपलब्ध होता है। माँ का...

  (सुभाष गाताडे) सत्तर के दशक में मशहूर नाटककार गुरुशरण सिंह का लिखा एक नुक्कड़ नाटक ‘हवाई गोले’ बहुत चर्चित हुआ, जिसमें लोकतंत्र की विडंबनाओं को उजागर किया गया था। नाटक में भूख से हुई मौत को छिपाने के लिए सरकारी अफसरों द्वारा किया गया दावा कि...

- किसी देश में एक उचित जीवन स्तर जीने के लिए जरूरी न्यूनतम आय को वहां की गरीबी रेखा कहा जाता है। इसकी कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। *🌏=>संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गरीबी:-* विकल्पों और मौकों का अभाव ही गरीबी है। यह मानव आत्मसम्मान का उल्लंघन...