School of Economics |
0
home,blog,paged,paged-76,ajax_fade,page_not_loaded,,qode-title-hidden,qode_grid_1300,qode-content-sidebar-responsive,qode-theme-ver-11.1,qode-theme-bridge,wpb-js-composer js-comp-ver-5.1.1,vc_responsive

  कृषि क्षेत्र में अगर निजी निवेश को लाया जा सके तो इससे इस क्षेत्र के विकास में काफी मदद मिल सकती है। रमेश चंद , (लेखक नीति आयोग और 15वें वित्त आयोग के सदस्य हैं।) एक ओर जहां सरकार ने अगले छह वर्ष में किसानों की आय...

*आभार_डॉ. श्रीश पाठक* भारत के मित्र समङो जाने वाले मालदीव से अभी चीन ने मुक्त व्यापार संधि संपन्न की, लेकिन फिर भी कहना होगा कि वैश्विक पटल पर और खासकर एशियाई क्षेत्र में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। दरअसल चीन के बढ़ते प्रभावों...

  घरेलू दुर्बलताएं और बाहरी अनिश्चितताएं नए साल में भी भारतीय विदेश नीति को तय करेंगी। श्याम सरन, (लेखक पूर्व विदेश सचिव और फिलहाल सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के वरिष्ठ अध्येता हैं)  विदेश नीति को प्रसारवादी स्वरूप देने की मोदी सरकार की मंशा और उसकी जोशीली आकांक्षाओं को...

  (भरत झुनझुनवाला) सदी के शुरू में अमेरिकी अर्थव्यवस्था गतिमान थी। माइक्रोसॉफ्ट विंडोज सॉफ्टवेयर बनाकर पूरी दुनिया में डिजिटल क्रांति लाया था। इसके बाद नई तकनीकों का आविष्कार ढीला पड़ गया और 2008 में अमेरिका में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ‘फेड’ ने ब्याज...

वैश्विक भूख सूचकांक में 100वें स्थान पर भारत 70 साल की आज़ादी का हासिल : भूख और कुपोषण के क्षेत्र में महाशक्ति मुकेश असीम भारत में दो वर्ष तक की उम्र के 10% से भी कम बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पोषक भोजन उपलब्ध होता है। माँ का...

  (डब्ल्यू पी एस सिद्धू, प्रोफेसर, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ) अस्वीकार करना एक मनोवैज्ञानिक रक्षा कवच है, जिसका इस्तेमाल लोग तब करते हैं, जब वे विभिन्न घटनाओं से असहज महसूस करते हैं और अपनी चिंता कम करना चाहते हैं। इन दिनों, जब ऐसा लग रहा है कि आने...

  (स्वदेश सिंह) सरकारें आएंगी, सरकारें जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, लेकिन देश का लोकतंत्र जिंदा रहना चाहिए। भारत का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए। 28 मई 1996 को लोकसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पर बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ये उद्घोषणा की थी। उनकी यह...

मुकेश असीम पिछले कई सालों से पूरे पूँजीवादी विश्व के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था भी गहन संकट से गुज़र रही है। आम जनता की घटती आय से बाज़ार में सिकुड़ती माँग से उद्योगों में नया निवेश नहीं हो रहा, पहले स्थापित उद्योग दिवालिया हो रहे हैं; बड़े...

    1.गैर-वन क्षेत्र में उगाया बांस अब नहीं है पेड़ • कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी सदस्यों के बहिर्गमन के साथ ही भारतीय वन (संशोधन) विधेयक राज्यसभा से पारित हो गया। इसी के साथ अब गैर-वन क्षेत्रों में उगाए गए बांस को वृक्ष नहीं माना जाएगा तथा इसकी...

  (जयंतीलाल भंडारी, अर्थशास्त्री ) नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मध्यम वर्ग के 17 करोड़ लोग हैं, जबकि आयकरदाताओं की संख्या महज 6.26 करोड़ है। माना जाता है कि सामान्य तौर पर वेतनभोगी वर्ग ही निर्धारित आयकर चुकाता है, लेकिन...