School of Economics | Discover, Learn & Grow
0
home,blog,paged,paged-91,ajax_fade,page_not_loaded,,qode-title-hidden,qode_grid_1300,qode-content-sidebar-responsive,qode-theme-ver-11.1,qode-theme-bridge,wpb-js-composer js-comp-ver-5.1.1,vc_responsive

  विश्व खाद्य दिवस प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का स्थापना दिवस है। एफएओ को संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट संस्था के तौर पर 16 अक्टूबर 1945 को रोम में स्थापित किया गया था। इस दिवस को मनाने का...

  ✍ *1.आइएमएफ ने सुझाये सुधारों के सूत्र* • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने भारत को तीन सूत्रीय ढांचागत सुधार का दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया है। इन सुधारों में कॉरपोरेट और बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर हालत से बाहर निकालना, राजस्व संबंधी कदमों के माध्यम से वित्तीय...

  प्रस्तावनाप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने विश्व बैंक समर्थित 6,655 करोड़ रूपये की दो नई योजनाओं –आजीविका संवर्द्धन के लिए दक्षता हासिल करने और ज्ञान बढ़ाने (संकल्प) तथा औद्योगिक मूल्य संवर्द्धन हेतु दक्षता सुदृढ़ीकरण (स्ट्राइव)योजनाओं को मंजूरी प्रदान कर...

  • चर्चा में क्यों? अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर को इस बार का नोबेल पुस्कार मिलना चर्चा का विषय रहा है। रिचर्ड थेलर के जिस योगदान को इस पुरस्कार ने सम्मानित किया है वह आज के दौर में खासतौर पर महत्त्वपूर्ण है। महत्त्वपूर्ण इसलिये क्योंकि यह अर्थशास्त्र के...

  अभी हाल तक अधिकांश नीति निर्माता इस बात से सहमत नजर आ रहे थे कि सरकारी बैंकों को बहुत अधिक वृद्घि की आवश्यकता नहीं है। उनकी दलील थी कि बैंकिंग क्षेत्र में प्रचुर क्षमता मौजूद थी। बॉन्ड बाजार का विस्तार हो रहा था, गैर बैंकिंग...

*🇮🇳India Falls 3 Places in Latest 🌐Global Hunger Index* With more than a fifth (21%) of its children wasted–low weight for height–India ranks 100 of 119 countries in the 2017 Global Hunger Index (GHI), down three places from 97 last year. Only in three other countries–Djibouti,...

Prabhat Patnaik September 26, 2017 The BJP government, like a bull in a China shop, is wrecking the economy. A neo-liberal regime, even at the best of times, i.e. even when the economy is booming, brings misery to the vast mass of the working people by...